मांझी के विवादित बोल.....
आजकल पूरे देश में
बिहार की चर्चा जोरों पर है.... बिहार की इतनी चर्चा तब भी नहीं हुई थी जब बिहार
का विकास दर 13 फीसदी के पार पहुंच गया था... अगर आप ये सोंच रहे है कि बिहार की
चर्चा वहां हो रहे विकास कार्यों या फिर नीतीश-लालू में हुए चुनावी गठबंधन को लेकर
हो रही है तो आप गलत है.... बिहार की चर्चा आजकल वहां के वर्तमान सीएम जीतन राम
मांझी की वजह से हो रही है... मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी आए दिन किसी न किसी
विवादित बोल की वजह से न्यूज चैनलों और अखबारों की सुर्खियां बन रहे है... जिस
नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार की जिम्मेदारी और नैतिकता का
हवाला लेते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दी थी... तब उन्होंने ने ये नहीं सोंचा
होगा कि वो जिसे अपना उत्तराधिकारी चुना है वही जेडीयू के साथ बिहार की छवि को धूमिल
कर देगा... शायद अब नीतीश कुमार को पछतावा भी हो रहा होगा कि किस मुहूर्त में
उन्होंने ये फैसला लिया...
राजनीति में परिवारवाद के खिलाफ आवाज बुलंद
करने वाले नीतीश कुमार को अपने उत्तराधिकारी की वजह से अब शर्मिंदगी महसूस हो रही
होगी। इन दिनों दामाद की वजह से जीतन राम मांझी की काफी किरकिरी हो रही है। जीतन राम
मांझी ने अपनी बड़ी बेटी के पति को ही अपनी पीए नियुक्त कर लिया। जिसकों लेकर
विरोधियों ने जमकर बवाल किया। सीएम पर विपक्षियों का दबाव इतना बढ़ गया कि उन्हें
पीए पद से अपने दामाद को इस्तीफा दिलवाना पड़ा। वैसे जीतन राम मांझी ने सफाई देते
हुए कहा था कि वो जब मंत्री थे तब से उनके दामाद पीए है। उनकी कोई नई नियुक्ति
नहीं हुई है। विपक्ष के पास सरकार के खिलाफ उठाने के लिए और कोई मुद्दा नहीं है
इसी वजह से इस छोटी सी बात को बतंगड़ बना रहे है।
वहीं बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले पूर्व
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा सोचा था कि एक उनके उत्तराधिकारी सीएम अधिकारियों
को घूस लेने की सलाह देंगे... ऐसे में ये अंदाजा लगाना काफी मुश्किल की है कि
बिहार की विकास की गाड़ी किस दिशा में जाएगी... पटना में अधिकारियों को संबोधित
करते हुए मांझी ने खुलासा किया कि उन्होंने घूस देकर 25 हजार रुपए का बिजली बिल
मात्र पांच हजार रुपए में सैटल करा लिया था, इसके साथ ही मांझी ने अधिकारियों से कहा
था कि अगर आप कालाबाजारी करते है तो अपने पेट के लिए, अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए,
मुझे नहीं लगता है कि आपके बच्चे विदेश में पढ़ते होंगे, बहुत होता होगा तो आप
अपने बच्चे को पटना या फिर किसी और छोटे शहर में पढ़ाते होंगे... अगर उसके लिए
कालाबाजारी करते है तो मैं आपको धन्यवाद देता हूं... और अगर छोटी मोटी गलतियां
होंगी तो बिहार के मुख्यमंत्री होने के नाते हम आपको माफ कर देंगे... इससे आप
अंदाजा लगा सकते है कि सूबे में चल रही भ्रष्टाचार को रोकने के लिए मांझी सरकार
कितनी गंभीर है...मांझी के इस बयान के बाद नीतीश कुमार ने अपना सर पीट लिया होगा। इस
विवादित बयान के हफ्ते भर बाद ही उन्होंने एक और विवादित बयान दे दिया। मांझी ने
दानापुर में दलितों की सभा को संबोधित करते हुए दलितों
को पीकर हंगामा करने से उनकी बिगड़ी छवि को ठीक करने का नया नुस्खा दिया है.... सभा
को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर अगर कोई एक पाव शराब पीकर सो जाता है तो
वे उसे बुरा नहीं मानते है... हालांकि उन्होंने दलित नौजवानों को सलाह दी कि वे दलित
दारु पीना बंद करें. अगर तुरंत बंद नहीं कर सकते तो दवाई के रुप में पिया करें...
पीकर वे लोग रोड पर इधर-उधर घूमते हैं तो समाज के लोग कह्ते हैं कि देखो दलित लोग
कैसे करते हैं. उन्होंने सलाह दी कि अगर वे कमा कर घर आते हैं तो रात में एक पउआ
दारु पी कर सो जाया करें. साथ ही मांझी ने ये भी कह दिया कि बड़े लोग तो दस हजार
रुपये की दारु पीते हैं. इसके साथ ही मांझी ने मुसहर समाज को चुहा और घोंघा खाने
की भी नसीहत दे दी।
बहरहाल जीतन राम मांझी को
सीएम बनाने के फैसले पर नीतीश कुमार को भले ही अब अफसोस हो रहा हो लेकिन वे अब कर
भी क्या सकते है। मांझी को आगे कर बिहार की राजनीति की रिमोट अपने हाथ में रखने का
दांव अब शायद उल्टा पड़ता दिख रहा है। जीतन राम मांझी के मुख्यमंत्री बनने के बाद
से बिहार में ना तो किसी नई योजना की शुरुआत हुई है... और ना ही सरकार के प्रति
लोगों का विश्वास बढ़ा है। हां इतना जरुर है कि मांझी ने विवादित बोल की वजह से
सुर्खियां जरुर बटोरी है। बिहार की जनता तो यहां तक चर्चा करने लगी है कि सीएम के
मुंह में जो आता है वो बोल देते है, बोलने से पहले कुछ भी नहीं सोचते है। भले ही
उसका अंजाम जो भी हो। ऐसे में 2015 में होनेवाले विधानसभा चुनाव में एकबार फिर
सत्ता में वापसी करने का ख्वाब संजो रहे नीतीश कुमार को लगने लगा होगा कि ऐसे सीएम
के नेतृत्व में सत्ता में आना काफी मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है... अगर समय
रहते नीतीश कुमार ने मांझी को कंट्रोल नहीं किया तो विधानसभा चुनाव में ऐसे नतीजों
के लिए नीतीश को अभी से ही तैयार हो जाना चाहिए।
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